जब उसने जिंदगी दांव पर लगा अनजान महिला की मदद करने का सोचा...

नई दिल्ली, लाइव हिन्दुस्तान टीम Updated: 20 मार्च, 2017 10:04 PM

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देर शाम मैं पार्क में टहल रहा था। अचानक पीछे आ रही एक बस से कुछ चिल्लाने की आवाज आने ली। मैं रुका, ये किसी महिला के चिल्लाने की आवाज थी। लग रहा था कि जैसे कुछ बदमाश उसे जबरन उठा कर ले जा रहे हैं। कुछ समय तक मैं यह सोचता रहा कि क्या मुझे इस पछड़े में पड़ना चाहिए। 

कई तरह के सवाल मन में उमड़-घुमड़ रहे थे। मैं घबरा रहा था, पता नहीं कौन है,  क्या मामला है। मैंने पुलिस को कॉल करना सही समझा। इससे पहले कि मैं कुछ कर पाता महिला की आवाज कम होती गई। अब मुझे जल्दी ही कुछ करना था। क्या मैं यहां से भाग जाऊं, आखिर में मैंने अपनी जिंदगी को दांव पर लगाकर उस अनजान महिला की मदद करने की ठान ली। अचानकर मेरे अंदर से मुझे मानसिक और शारीरिक ताकत मिली और मैं हिम्मत बटोर कर बस के पीछे भागने लगा। मैंने एक बदमाश को पकड़ लिया और कई मिनटों तक हममे झड़प होने लगी। तभी दोनों बदमाश कूदकर भाग गए और लड़की बस से नीचे उतर गई।  

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मैं बहुत मुश्किल से सांस ले पा रहा था। जैसे-तैसे करके मैं उस लड़की के पास गया जो डर के मारे पेड़ के पीछे खड़ी थी। वहां बहुत अंधेरा था, मैं बड़ी मुश्किल से उसका चेहरा देख पा रहा था। मुझे लगा कि लड़की बहुत डरी हुई थी, इसलिए मैंने उससे कहा, डरो मत, अब तुम सुरक्षित हो। बदमाश भाग गए हैं। कुछ ही पल बाद मैंने उसकी आवाज सुनी, वह बोली, पापा ये आप हैं? मैं आश्चर्य में था, वो मेरी बड़ी बेटी थी। 

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