डॉक्टरों ने दिखाई दबंगई, पार्किंग से मना किया तो गार्ड को पीटा

भागलपुर । कार्यालय संवाददाता Updated: 19 मार्च, 2017 12:42 PM

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मायागंज अस्पताल में शनिवार को इमरजेंसी के सामने स्कूटी पार्किंग से मना करने पर जूनियर डॉक्टरों ने सुरक्षाकर्मी (पूर्व सैनिक) की पिटाई कर दी। एक डॉक्टर व उनके रिश्तेदार के साथ शुरू हुए विवाद ने इतना तूल पकड़ा कि अन्य डॉक्टर भी इसमें शामिल हो गए और इमरजेंसी के बाहर करीब 15 मिनट तक हाथापाई होती रही।

इमरजेंसी में तैनात सीनियर डॉक्टर और बाहर खड़े लोगों ने मामला शांत कराया। इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने चार घंटे तक ड्यूटी का बहिष्कार कर अस्पताल अधीक्षक से शिकायत की और अपने सिक्योरिटी कमांडर के निर्देश पर चार बजे के बाद ड्यूटी पर लौटे।

सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि दोपहर करीब 12:45 बजे जूनियर डॉक्टर पंकज कुमार ने इमरजेंसी के सामने नीली स्कूटी लगा दी। सुरक्षाकर्मी अरुण यादव ने उन्हें अस्पताल प्रशासन के निर्देश का हवाला देते हुए पार्किंग से मना किया। आरोप है कि इसी बात पर उन्होंने विवाद शुरू कर दिया और नौकरी से निकलवाने तक की धमकी दे डाली।

अरुण यादव फिर भी अपनी बात पर अड़ा रहा तो डॉक्टर ने उसे तमाचा जड़ दिया। कुछ देर बाद अन्य जूनियर डॉक्टर भी आ गए और हाथापाई बढ़ती चली गई। इमरजेंसी में तैनात सीनियर डॉक्टरों ने मामला शांत कराकर जूनियर डॉक्टर को इमरजेंसी के डाक्टर रूम में भेज दिया। अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरसी मंडल ने भी मौके पर पहुंचकर जानकारी ली।

गार्ड ने भी इमरजेंसी में घुसकर डॉक्टर को पीटा : अधीक्षक

अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरसी मंडल ने बताया कि डॉक्टर और गार्ड में मारपीट हुई है। डॉक्टर के साथ उसके रिश्तेदार भी थे। मालूम हुआ है कि बाहर मारपीट करने के बाद गार्ड ने इमरजेंसी में घुसकर भी डॉक्टर की पिटाई की है। सोमवार को वीडियो फुटेज देखने के बाद कार्रवाई की जाएगी।

इमरजेंसी से लेकर आईसीयू तक चार घंटे भगवान भरोसे

मायागंज अस्पताल में जूनियर डॉक्टर और सुरक्षाकर्मियों के बीच शनिवार को हुई मारपीट के कारण चार घंटे तक सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे ही रही। मारपीट के कारण सुरक्षाकर्मियों ने ड्यूटी का बहिष्कार कर दिया। इससे 12.45 से लेकर 4 बजे तक विभिन्न विभागों में अराजक जैसी स्थिति बनी रही। इमरजेंसी से लेकर पेइंग वार्ड, आईसीयू, मेडिसिन, सर्जरी विभाग, ब्लड बैंक में एक भी सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं था। मरीज से मिलने के लिए परिजनों की भीड़ लगने लगी थी और उन्हें हटाने में नर्सों को भारी मशक्कत करनी पड़ी।

पिछले माह सफाईकर्मी को मारा था थप्पड़

सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि जूनियर डॉक्टरों द्वारा अस्पताल में इस तरह की हरकत करना कोई पहला मामला नहीं है। उन्हें रोक-टोक बर्दाश्त नहीं है। पिछले माह एक डॉक्टर ने सफाईकर्मी को सिर्फ इसलिए थप्पड़ जड़ दिया था, क्योंकि उसने सफाई के दौरान डॉक्टर को दूसरी तरफ से जाने के लिए कह दिया था। सफाईकर्मियों ने भी काम रोककर विरोध किया था। इस मामले में भी अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। यही वजह है कि ये डॉक्टर अपने सामने किसी की इज्जत नहीं करते हैं।

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