सिंधु आयोग की बातचीत से बहाल हो सकती है भारत—पाक शांति वार्ता

इस्लामाबाद, एजेंसी  Updated: 20 मार्च, 2017 7:32 PM

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सिंधु जल आयोग की बातचीत से भारत और पाकिस्तान के बीच स्थगित शांति वार्ता की बहाली का रास्ता खुल सकता है। स्थानीय मीडिया की एक खबर में विशेषज्ञों के हवाले से यह बात कही गई है।

दो दिन चलने वाली वार्ता कड़ी सुरक्षा के बीच आज इस्लामाबाद में शुरू हुई। डॉन की खबर के अनुसार यह बातचीत दोनों देशों के बीच स्थगित शांति प्रक्रिया बहाल करने की दिशा में पहला कदम साबित हो सकती है।

हालांकि भारतीय अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से वार्ता को ज्यादा तवज्जो न देते हुए कहा कि यह सिंधु जल आयोग की एक नियमित बैठक भर है, पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे ज्यादा तवज्जो दी।

वार्ता का महत्व भारत के सिंधु जल आयुक्त पी के सक्सेना के एक पत्र से बढ़ जाता है, जिसमें उन्होंने भारत द्वारा झेलम और चेनाब नदियों पर क्रमश: किशनगंगा एवं रातले पनबिजली परियोजनाओं के निमार्ण जैसे विवादों पर चर्चा का प्रस्ताव रखा है।

हालांकि पाकिस्तान इस प्रस्ताव को खारिज कर चुका है क्योंकि मामला पहले ही विवाद के समाधान के लिए विश्व बैंक के पास ले जाया गया है। लेकिन पाकिस्तानी अधिकारी बातचीत को लेकर उत्साहित हैं।

पाकिस्तान के सिंधु जल आयुक्त मिर्जा आसिफ बेग ने कहा, यह वार्ता महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत एक साल से अधिक समय तक मना करने के बाद अब मुद्दों पर चर्ता के लिए वार्ता की मेज पर वापस आ गया है।

उन्होंने कहा, वे जल संधि निलंबित करने को लेकर बातचीत कर रहे थे लेकिन अब वे इससे बाहर आ गए हैं।

बेग ने कहा कि भारतीय आयुक्त ने पत्र में रातले और किशनगंगा परियोजनाओं को वार्ता में शामिल करने की मांग की थी लेकिन पाकिस्तान ने प्रस्ताव ठुकरा दिया।

'मोदी अपनी रणनीति में सफल'
पाकिस्तान के पूर्व आयुक्त सैयद जमात अली शाह ने इस बैठक को पूर्व के रूख से आगे बढ़ना बताया लेकिन साथ ही कहा कि इससे मुद्दे पर पाकिस्तान की असहाय स्थिति का भी पता चलता है। 

उन्होंने कहा, हालांकि यह एक नियमित बैठक है और भारत इसका इस्तेमाल उन मुद्दों को वापस वार्ता की मेज पर लाने के लिए कर रहा है, जिन्हें मध्यस्थता के लिए पहले ही विश्व बैंक के पास ले जाया जा चुका है, इससे पाकिस्तान सरकार की प्रतिक्रियावादी नीति का पता चलता है।

शाह ने कहा, मेरी राय में मोदी अपनी रणनीति में सफल रहे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की मध्यस्थता कराने की कोशिशों को रोक दिया और युद्ध स्तर पर छह विशाल पनबिजली परियोजनाएं शुरू कर दीं।

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