दो परमाणु रिएक्टरों को हुए चेचक की जांच में जुटे वैज्ञानिक

मुंबई । एजेंसी Updated: 19 मार्च, 2017 12:01 PM

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बेहद सुरक्षित भारतीय परमाणु रिएक्टर परिसर में विकिरण रोधी मजबूत पाइपों पर कुछ ऐसी विसंगति देखने को मिली है, जैसी इंसानों में चेचक के संक्रमण के दौरान देखने को मिलती है।

इसलिए, बॉलीवुड की एक थ्रिलर फिल्म की कहानी की तरह भारतीय वैज्ञानिक गुजरात के काकरापार परमाणु उजार् संयंत्र में परमाणु रिसाव की गुत्थी सुलक्षाने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं।  

21वीं सदी का यह एटॉमिक पॉट बॉयलर असल में वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत का परिणाम है। इसकी दीवार उस मशहूर संपत्ति से जुड़ी है, जहां जाने—माने बॉलीवुड फिल्म स्टार राजकपूर रहा करते थे।

यहां वे दक्षिणी गुजरात में दोहरे रिएक्टरों से हुए रहस्यमयी रिसाव की असल वजह का पता लगाने के लिए अतिरिक्त समय तक काम कर रहे हैं। किसी भी अफरातफरी और किसी अन्य दुर्घटना से बचने के लिए भारतीय परमाणु निगरानी संस्था— परमाणु उजार् नियमन बोर्ड ने प्रभावित संयंत्रों को तब तक के लिए बंद कर दिया है, जब तक रिसाव की वजह का पता नहीं लगा लिया जाता।

परमाणु विशेषज्ञों का कहना है कि एक दुर्लभ मिश्रधातु से बने पाइपों के उपर चेचक जैसा संक्रमण हुआ है और यह संक्रमण गुजरात के काकरापार में दो भारतीय संपीडित भारी जल रिएक्टरों की नलियों में फैल चुका है। इस पर दुखद स्थिति यह है कि एक साल से अधिक समय तक जांच के बावजूद वैज्ञानिक यह नहीं समक्ष पाए हैं कि गड़बड़ी हुई कहां है।

जापान के फुकुशिमा रिएक्टरों में विस्फोटों के ठीक पांच साल बाद 11 मार्च 2016 की सुबह काकरापार में 220 मेगावाट संपीडित भारी जल रिएक्टर की इकाई संख्या एक में भारी जल का रिसाव शुरू हो गया और उसे आपात स्थिति में बंद करना पड़ा।

स्वदेश निर्मित परमाणु संयंत्र के प्राथमिक प्रशीतक चैनल में भारी जल का रिसाव हुआ और संयंत्र में आपात स्थिति की घोषणा कर दी गई। भारतीय परमाणु उजार् विभाग ने इस बात की पुष्टि की कि कोई भी कर्मचारी विकिरण के प्रभाव में नहीं आया और संयंत्र के बाहर कोई रिसाव नहीं हुआ।

भारतीय परमाणु संचालक न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने कहा, रिएक्टर को सुरक्षित ढंग से बंद कर दिया गया है और विकिरण का कोई रिसाव नहीं हुआ।

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