ऑफिस में यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को 90 दिन का पेड लीव

नई दिल्ली, एजेंसी। Updated: 21 मार्च, 2017 9:50 AM

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केंद्र सरकार की ऐसी महिला कर्मचारी जिन्होंने ऑफिस में यौन शोषण की शिकायत  दर्ज कराई है, उन्हें मामले की जांच लंबित रहने तक 90 दिन का पेड लीव मिलेगा। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT) ने इस संबंध में हाल ही में सेवा नियमावली में बदलाव किया है। 

नए नियम में कहा गया है कि कार्यस्थल पर महिलाओं से यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के तहत जांच लंबित रहने तक पीड़ित महिला सरकारी कर्मचारी को 90 दिन तक का विशेष अवकाश दिया जा सकता है। इसमें कहा गया कि पीड़ित महिला को दी गई छुट्टी उसके खाते की छुट्टियों से नहीं काटी जायेगी।

यह छुटटी पहले से केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाली छुटटी के अलावा होगी। नियम में कहा गया कि इस मामले में विशेष छुट्टी ऐसे मामले की जांच के लिए गठित आतंरिक समिति या स्थानीय समिति की अनुशंसा पर दी जाएगी। नए प्रावधान को लागू करने के लिए डीओपीटी ने केंद्रीय लोक सेवा (अवकाश) संशोधन नियम, 2017 जारी किया है। 

यह नियम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ऐसी शिकायतें मिलती रही हैं कि यौन शोषण पीड़ित महिलाओं को धमकियां दी गई हों या उन्हें बयान बदलने को मजबूर किया गया हो। अब ऐसे मामलों में पीड़ित महिला आंतरिक कमिटी की सिफारिश के आधार पर स्पेशल लीव दी जाएगी और आरोपों की जांच के लिए एक स्थानीय कमिटी का गठन किया जाएगा।

दिसंबर 2016 में डीओपीटी ने कार्यस्थल पर यौन शोषण का शिकार होने वाली महिलाओं के मामलों को लेकर दिशानिर्देश जारी किए थे, जिसके तहत 30 दिनों में केस की जांच पूरी करने की बात कही गई थी। य़ह भी कहा गया था कि किसी भी सूरत में शिकायत किए जाने के 90 दिनों के भीतर जांच पूरी हो जानी चाहिए।

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