इनसे सीखें: कभी थे बेरोजगार, अब दूसरों को देते हैं रोजगार

फरीदाबाद। दयाराम वशिष्ठ Updated: 19 मार्च, 2017 7:33 PM

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एक समय था, जब करनाल के गुरबक्स सिंह नौकरी की तलाश में थे, नौकरी न मिलने पर हिम्मत नहीं हारी। मन में कुछ करने की ललक थी। इसी के चलते उन्होंने करनाल के नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट से मधुमक्खी पालन की कुछ दिनों की ट्रैनिंग कर ली। इसके बाद उन्होंने पीछे मुडकर नहीं देखा। आज गुरबक्स सिंह एक उदाहरण हैं, जो मधुमक्खी के कारोबार से प्रतिमहीने लाखों रुपये कमा रहे हैं। ऐसा करके वे न केवल दूसरों को रोजगार दे रहे हैं, अपितू किसानों को मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग देकर उन परिवारों का सहारा बने हुए हैं। 

सूरजकुंड के कृषि नेतृत्व शिखर सम्मेलन में 64 वर्षीय गुरबक्स सिंह स्टाल लगाकर न केवल अपने उत्पादन शहद समेत अन्य उत्पादों को बेच रहे हैं, अपितु किसानों को मधुमक्खी पालन खोलने का पाठ भी पढ़ा रहे हैं। उन्होंने हिन्दुस्तान से विशेष बातचीत में कहा कि इस काम में ज्यादा जमीन की जरुरत नहीं। थोड़ी सी जमीन पर कोई भी किसान अपना यह व्यवसाय कर सकता है। इसके लिए दृढशक्ति का होना जरुरी है। अब वह कई यूनिट स्थापित कर प्रतिवर्ष 40 से 50 टन शहद का उत्पादन करते हैं। इसे लेकर वह एगमार्क से लाइसेंस भी ले चुके हैं। इसके साथ अब वह बादाम तेल व नीबू का अचार समेत कई उत्पाद बाजार में लाए हैं।

मशरूम के लड्डू व नमकीन बनाकर कर रहे हैं अच्छी कमाई
एयरफोर्स से सेवानिवृत्ति के बाद करनाल के रहने वाले अमित गुप्ता ने खेती में रुचि दिखाते हुए सलाद पत्ता व रंगीन शिमला मिर्च का उत्पादन किया। नर्सरी लगाकर गुलाब का उत्पादन किया। इससे उन्हें अच्छी खासी आमदनी हुई। बाद में उन्होंने अपने साथ महिला सहयोगी सीमा गुलाटी के साथ मिलकर मशरूम की खेती शुरु की। इससे उन्हें अच्छा मुनाफा हुआ। लेकिन बाजार में मशरूम की मांग कम होने से उनकी आमदनी उम्मीद से कम रही। इसके चलते अब उन्होंने मशरूम से बनने वाले आयटमों के उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया। अमित गुप्ता ने हिन्दुस्तान को बताया कि भारत में जहां प्रतिव्यक्ति मशरूम की खपत .3 ग्राम है, वहीं यूएसए में इसकी खपत प्रति व्यक्ति 3 किलोग्राम है। इससे विटामिन डी की अक्सर कमी रहती है। अब वे विटामिन डी की कमी पूरी करने के उद्देश्य से बाजार में मशरूम से निर्मित कई तरीके के उत्पाद लेकर आए हैं। इनमें मशरूम के लड्डू और नमकीन समेत कई आयटम शामिल हैं। उनका मानना है कि इससे जहां बाजार में मशरूम की मांग बढे़गी, वहीं विटामिन डी की कमी भी पूरी होगी। 

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