पीडब्ल्यूडी घोटाला: केजरीवाल के खिलाफ शिकायत एसीबी को भेजी गई

नई दिल्ली, एजेंसी Updated: 18 मार्च, 2017 3:53 PM

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दिल्ली पुलिस ने शनिवार को एक अदालत को बताया कि कथित पीडब्ल्यूडी घोटाले में मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल, उनके रिश्तेदार और एक सरकारी अधिकारी के खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत को भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) को स्थानांतरित कर दिया गया है।

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अभिलाष मल्होत्रा के समक्ष दायर की गई रिपोर्ट में कहा कि उसने शिकायत को लेकर जांच की और अब इसे एसीबी को भेज दिया गया है। आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि शिकायत आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए भ्रष्टाचार निरोधक शाखा को भेज दी गई है।

अदालत ने शिकायत पर अगली सुनवाई के लिए मामले को 23 मार्च के लिए सूचीबद्ध कर दिया। अदालत रोडस एंटी करप्शन ऑगेर्नाइजेशन के संस्थापक राहुल शर्मा की शिकायत पर सुनवाई कर रही थी जिसमें केजरीवाल, उनके रिश्तेदार सुरेंद्र बंसल और एक लोकसेवक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आग्रह किया गया है। शिकायत में दिल्ली में सड़कों और सीवर लाइनों से संबंधित ठेकों में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है।

शिकायतकर्ता की ओर से याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता के पांडेय ने भ्रष्टाचार की जड़ों के गहरे तक फैली होने का आरोप लगाया है और कहा कि दस्तावेजों से पता चलता है कि कोई भी सामग्री असल में परियोजना कायार्न्वयन के लिए नहीं खरीदी गई। एक अन्य अदालत ने पूर्व में मजिस्ट्रेट मल्होत्रा की अदालत से मामले को स्थानांतरित करने का आग्रह करने संबंधी बंसल की याचिका को खारिज कर दिया था और कहा था कि आवेदन विचार योग्य नहीं है। आर्थिक अपराध शाखा ने अदालत के समक्ष पूर्व में एक स्थिति रिपोर्ट दायर करते हुए अपनी जांच को पूरा करने के लिए समय मांगा था।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि सामग्री की खरीद दिखाने वाले दस्तावेज मनगढंत और फर्जी हैं तथा इससे सरकारी खजाने को 10 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। याचिका में मांग की गई कि मुख्यमंत्री की भूमिका की जांच की जानी चाहिए क्योंकि उन्होंने बंसल और अन्य को कथित तौर पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए काफी लाभ पहुंचाया।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि बंसल कई वरिष्ठ पीडब्ल्यूडी अधिकारियों से मिलकर सरकारी ठेके हासिल करने के लिए कई फर्जी कंपनियां चलाता था। ये ठेके कभी भी क्रियान्वित नहीं हुए, जबकि केजरीवाल के दबाव में सभी भुगतान आश्चर्यजनक ढंग से कर दिए गए।

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