गौरेया का संसार बढ़ा रहा पूर्व मंत्री का बेटा ‘नरेंद्र’

फरीदाबाद। अशोक कुमार Updated: 20 मार्च, 2017 11:07 PM

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जब पेड़-पौधों और जंगलों का तेजी से समाप्त होना जारी हो और तालाब-तैलेया, नदी-नाले सूखते जा रहे हो, परिणामत: पर्यावरण संतुलन तेजी से बिगड़ रहा है, ऐसे में एक सख्स ऐसा भी है, जिसने लुप्त होती पेड़-पौधों और पक्षियों की प्रजातियों को संवारने का बीड़ा उठाया है। यह व्यक्ति हैं पूर्व मंत्री शारदा रानी के बेटे नरेंद्र सिंह। 

गांव कौराली में हरियाणा की पहली महिला गृहमंत्री शारदा रानी के फार्म हाउस में गौरैया के झुंड रहते हैं। इनकी देखभाल पूर्व मंत्री के बेटे अधिवक्ता नरेंद्र सिंह व उनकी पत्नी गीता सिंह करती हंै। अमेरिका में पढ़े लिखे नरेंद्र अब गांव में ही भारतीय संस्कृति और परम्पराओं को जीते हैं। विश्व गौरेया दिवस पर सोमवार को नरेंद्र सिंह ने पूरा दिन क्षियों के साथ गुजारा। गौरेया की चींचाहट उन्हें पर्यावरण संरक्षण के लिए और प्रेरित करती है। उनके फार्म हाउस में   सैंकड़ों गौरेयों की चीचाहट एक साथ बच्चों समेत सभी को मंत्रमुग्ध करती हैं। गौरेया कभी लोगों के घरों में घौंसला बनाकर शान से चींचाहट करती थी, अब ढूंढें भी दिखाई नहीं देती है। ऐसे में पर्यावरण प्रेमी अधिवक्ता नरेंद्र सिंह इन्हें बचाने में लगे हैं।

अमेरिका में पढ़े लिखे नरेंद्र अब गांव में ही भारतीय संस्कृति और परम्पराओं को जीते हैं। अधिवक्ता नरेंद्र सिंह पर्यावरणप्रेमी हैं, उन्होंने अपने फार्महाउस में गौरैया के कृत्रिम घोंसले बनवाए हैं, जिनमें गौरैया अपना घौंसला बनाती है। पक्षियों के खाने के लिए फार्म हाउस में करीब दो सौ फलदार वृक्ष हैं। गौरैया को रैठा अंगूर आदि फल खाना पसंद है। इसलिए ऐसे पेड़-पौधों का विशेष ध्यान रखा गया है।

नरेंद्र सिंह बताते हैं कि पेड़-पौधों व पशु-पक्षियों से उन्हें बचपन से ही प्रेम है। पर्यावरण का महत्व उन्हें अमेरिका में समझ में आया और सीधे गांव आकर पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों के बीच रहना शुरू किया। 

फार्म हाउस में पक्षियों के पसंदीदा फलदार वृक्ष
नरेंद्र सिंह ने पक्षियों के लिए उनके पंसदीदा  फलदार वृक्ष भी लगाए हुए हैं। करीब दो एकड़ जमीन पर विकसित फार्म हाउस में अर्जुन, रैठा, अंगूर की बेल, नारियल, रुद्राक्ष, चीकू, बांस, आडू, चंपा, नाग चंपा, अमरुद, तुलसी, गिलॉय, किन्नू, पाईन ट्री, चंदन, लिली, खजूर, चाइना रोज, आंवला, बिन्नी, कचनार, संतरा, चकोरता, काला शहतूत, सफेद शहतूत, नाशपाती, जामुन, संतरा, खिन्नी, इमली, बेल पत्थर, अनानाश, कदम, नीम व पीपली आदि पेड़ पौधे हैं। 

डेलचंद सागर, निरीक्षक, वन्य-प्राणी विभाग: बीते सालों से गौरैया विलुप्त हो रही है। गौरैया अंडे निषेचन के लिए कच्चे मकान में अपना घौंसला बनाती है। उसके अंडों को संतुलित मौसम चाहिए। शहर आबाद होने से पक्के मकान बन गए। पक्के मकानों में गौरैया अपना घौंसला नहीं बनाती है। जब घौंसला और अंडा निषेचन के लिए जगह नहीं मिलेगी तो फिर इनकी संख्या नहीं बढ़ेगी। 

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