बिहार: आठवीं तक के 50% बच्चों ने अब तक लौटाईं किताबें

पटना, हिन्दुस्तान ब्यूरो Updated: 21 मार्च, 2017 7:43 AM

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तीसरी से आठवीं कक्षा के करीब 50 फीसदी बच्चों ने अब अपनी किताबें लौटाई हैं। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद (बीईपी) ने सोमवार को तीन जिलों से मौखिक रिपोर्ट ली है। साथ ही पूरी विस्तृत रिपोर्ट इस संबंध में सभी जिलों से मांगी है। 18 मार्च से मूल्यांकन चल रहा है, जो 25 मार्च को समाप्त होगा। 18 मार्च को हिन्दी व उर्दू का मूल्यांकन हुआ था। उसी दिन इन विषयों की किताबें बच्चों से वापस ली गईं। 

गौरतलब है कि बीईपी ने जिलों को निर्देश दिया है कि वार्षिक मूल्यांकन के दौरान बच्चों से सर्व शिक्षा अभियान के तहत उपलब्ध कराई गईं सभी विषयों की किताबें ले लेनी है। ताकि यही किताब उस कक्षा के नए बच्चों को अगले साल की पढ़ाई के लिए उपलब्ध कराई जा सके। बच्चों को समय पर किताबें उपलब्ध हो जायें, इसी मकसद से यह आदेश जारी किया गया था। जिस विषय का मूल्यांकन है, उसी दिन उस विषय की किताब बच्चों को विद्यालय में लेकर आनी है। 

सोमवार को मुंगेर, पूर्वी चंपारण और भागलपुर जिले से मौखिक रिपोर्ट बीईपी ने ली। जिलों द्वारा यह भी बताया गया कि बच्चों द्वारा लौटायी जा रही किताबें, खासकर तीसरी से पांचवीं तक की सही हालत में नहीं हैं। कई किताबों के कुछ पन्ने फटे हुए हैं। 

बीईपी के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि जिलों से पूरी रिपोर्ट आने के बाद जानकारी हो पायेगी कि कुल कितनी किताबें बच्चों ने लौटायी। तीसरी से आठवीं कक्षा के करीब डेढ़ करोड़ बच्चे हैं। 
 
18 मार्च को हुआ था हिन्दी व उर्दू का मूल्यांकन 
20 को गणित का हुआ मूल्यांकन
अभी होना है मूल्यांकन 
21 मार्च :अंग्रेजी
23 मार्च :विज्ञान व सामाजिक विज्ञान
24  मार्च:राष्ट्र भाषा
25 मार्च :अन्य शैक्षिक गतिविधि

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