कानपुर ओएफसी पांच साल में 500 धनुष तैयार करेगी

कानपुर प्रमुख संवाददाता Updated: 19 मार्च, 2017 9:18 PM

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सरहदों की रक्षा जल्द ही सौ फीसदी स्वदेशी टैंक ‘धनुष के हवाले होगी। ऑर्डिनेंस फैक्ट्री कानपुर सेना की जरूरत के मुताबिक धनुष बनाने के लिए तैयार है। ओएफसी की तैयारियों का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि निर्माणी ने पांच साल में 500 धनुष बनाने की क्षमता हासिल कर ली है। इस संबंध में बल्क प्रोडक्शन ऑर्डर मिल चुका है।

सेना के लिए टैंक सबसे बड़ी जरूरत हैं। फिलहाल सरहदों पर बोफोर्स तोपें तैनात हैं जो 32 साल पुरानी हैं। अब ये तोपों पुरानी हो चुकी हैं और इन्हें बदलने की मांग सेना लंबे समय से कर रही थी। इसी आधार पर ओएफसी ने धनुष टैंक तैयार किया, जिसे कई चक्रों के परीक्षण के बाद सेना ने पास कर दिया है। हाल में धनुष तीन महीने तक लेह में कड़ी परीक्षा देकर पास हो गया। अब 50 डिग्री तापमान में परीक्षा देने के लिए छह धनुष टैंक पोखरण जाएंगे। लेह की सफलता के बाद धनुष की मांग फाइनल हो चुकी है।

414 धनुष टैंक की मांग सेना कर चुकी है। इसे देखते हुए ओएफसी ने भी खुद को तैयार कर लिया है। अकेले ओएफसी में ही 300 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है। चूंकि धनुष के निर्माण में फील्ड गन फैक्ट्री का भी योगदान है इसलिए उसे भी 200 करोड़ से हाईटेक किया जा चुका है। दुनिया की सबसे आधुनिकतम मशीनों से लैस दोनों फैक्ट्रियां पांच साल में सेना को 500 धनुष देने के लिए तैयार हैं।

इतना ही नही इन फैक्ट्रियों की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि धनुष के अलावा बीस साल तक सेना की हर जरूरत को पूरा करने के लिए खुद को तैयार कर लिया है। ओएफसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मशीनों के मामले में यूरोप को कोई जोड़ नहीं है। जर्मनी, स्विजरलैंड, इटली और आस्ट्रिया की हाइटेक तकनीक कानपुर में आ चुकी है। ओएफसी की ताकत कई गुना बढ़ चुकी है। इसी का परिणाम है कि अभी तक सालाना 10-20 धनुष बनाने की क्षमता वाली आयुध निर्माणी 100 धनुष प्रति वर्ष तैयार करने की क्षमताओं से लैस हो चुकी है।

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