टीम योगी में शामिल हुए ये राज्यमंत्री

Updated: 19 मार्च, 2017 11:26 PM

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टीम योगी में दो डिप्टी सीएम के अलावा कुल 44 मंत्रियों ने शपथ ली। इसमें 22 को कैबिनेट मंत्री 9 को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और 13 को राज्यमंत्री बनाया गया है।

देखें यहां कुछ राज्यमंत्रियों का यहां तक का सफर-

1- भूपेन्द्र सिंह (राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार)
यह भाजपा पश्चिमी यूपी के क्षेत्रीय अध्यक्ष और एमएलसी हैं। भूपेंद्र सिंह लंबे समय से भाजपा में हैं। संभल से जब मुलायम सिंह चुनाव मैदान में थे तो भाजपा ने भूपेंद्र सिंह को उनके सामने प्रत्याशी बना कर उतारा था। भूपेंद्र सिंह जाट समाज से आते हैं और भाजपा संगठन में उनकी अच्छी पैठ है। 

2- डा धर्म सिंह सैनी (राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार )
 4 अप्रैल 1961 जन्मे सैनी नकुड़ सीट से विधायक हैं। जिला सहारनपुर 21 सितंबर 2016 को की भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। 2017 का चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़े और कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष इमरान मसूद को लगातार दूसरी बार हराया
। 2002 से लगातार नकुड़ विधानसभा सीट से विधायक बसपा के टिकट पर लगायी जीत की हैट्रिक बसपा शासनकाल में रहे हैं कैबिनेट शिक्षा मंत्री।

3- राजेश अग्रवाल (कैबिनेट मंत्री)
विधायक - बरेली कैंट 
पिता का नाम - रामेश्वर सरन अग्रवाल
उम्र - 73
पत्नी - पुष्पा अग्रवाल
पता - 276- कालीबाड़ी, बरेली
शिक्षा - एमए
बेटा - मनीष अग्रवाल
राजनैतिक सफर: भाजपा शहर और कैंट सीट से छठी बार बार विधायक बने राजेश अग्रवाल विधानसभा उपाध्यक्ष रहे हैं और अभी भाजपा के प्रदेश कोषाध्यक्ष हैं। कल्याण सिंह सरकार में कर एवं निबंधन मंत्री रह चुके हैं। संघ पृष्‍ठभूमि के हैं। संगठन में मजबूत पकड़ रखते हैं और रुहेलखंड के कद़दावर भाजपा नेताओं में शुमार होते हैं। 

मंत्री बनने के बाद बोले राजेश: कैबिनेट मंत्री की शपथ लेने के बाद राजेश अग्रवाल ने फोन पर हिन्दुस्तान से बातचीत में कहा कि जो भाजपा सबसे पहले प्रदेश की खराब कानून व्‍यवस्‍था को पटरी पर लाएगी। पिछली सपा सरकार ने प्रदेश को हर मामले में पीछे धकेल दिया। नई सरकार किसानों, गरीबों, नौजवानों और व्यापारियों को ध्यान में  रखकर अपना कामकाज शुरू करेगी। जल्द ही विकास का खाका खींचकर उस पर तेजी से काम शुरू कर दिया जाएगा। उन्‍हें जो भी मंत्रालय मिलेगा, उसकी जिम्‍मेदारी अच्‍छी तरह से निभाएंगे। जनभावनाओं के अनुरूप काम किया जाएगा। 

4- राजेन्द्र प्रताप सिंह (कैबिनेट मंत्री)
मोती सिंह के नाम से मशहूर। चौथी बार विधानसभा पहुंचे। 2003 में उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री भी रह चुके हैं।  

5- मुकुट बिहारी वर्मा (कैबिनेट मंत्री)
बीजेपी ने इस बार फिर अपने कामयाब चेहरे पर दांव लगाते हुए मुकुट बिहारी वर्मा को टिकट देकर चुनावी अखाड़े में उतारा है। ये मौजूदा समय में बीजेपी से कैसरगंज के एमएलए हैं और कुर्मी वोट बैंक के आलावा पिछड़ी जाति के वोटों पर इनकी तगड़ी पकड़ है।

6- राजकुमार जयप्रताप सिंह 

जन्म- 7 सितम्बर 1953
पता- बांसी राजघराना, बांसी, सिद्धार्थनगर

शिक्षा
1974 में बाम्बे यूनिवर्सिटी से 1974 में बीए 
1983 में वसुंधरा कुमारी से शादी। दो बेटे। 

राजनीतिक सफर
1989--बतौर निर्दल उम्मीदवार बांसी से लड़े, विधायक बने
1991-- निर्दल प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीते, भाजपा में शामिल
1993, 1996, 2002--में भी भाजपा विधायक
2007--बांसी सीट से हारे
2012, 2017--भाजपा के ही टिकट पर फिर जीते
2014--विधायक जयप्रताप सिंह की पत्नी भाजपा से बगावत कर कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ीं, हारीं। 

ताकत-राजघराने से होने के बावजूद सरल, सहज।

पशु-पक्षियों के प्रेमी हैं योगी, बेजुबानों की भी समझते हैं भाषा

7- स्वाति सिंह (राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार )
यह बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष है। उनके पति दयाशंकर सिंह को मायावती के खिलाफ अभद्र टिप्पणी को लेकर भाजपा से निष्कासित कर दिया गया था जिसके बाद भाजपा ने स्वाति को लखनऊ के सरोजनी नगर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने  34,047 वोट से जीत दर्ज की। इस जीत के बाद उनके पति दयाशंकर सिंह की बीजेपी में वापसी भी हो गई।

यूपी के सीएम बने योगी आदित्यनाथ, 22 कैबिनेट मंत्रियों ने भी ली शपथ

8- सुरेश राणा (राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार )
यह शामिली जिले की थाना भवन सीट से विधायक हैं। सुरेश राणा एक किसान परिवार से आते हैं। राणा थाना भवन सीट से 2012 में भी विधायक चुने गए थे। इस बार दूसरी बार इसी सीट से विधायक बने हैं। सुरेश राणा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा के फायरब्राड नेता माने जाते हैं। इनकी छवि भी हिन्दूवादी नेताओं के रूप में हैं।

9- अनुपमा जायसवाल (राज्य मंत्री स्वतंत्र  प्रभार )
यह यूपी की बहराइच सीट से विधायक चुनी गईं  हैं। पिछले विधानसभा चुनाव (2012) में अनुपमा जायसवाल को सपा के वकार अहमद शाह ने हरा दिया था। अनुपमा जायसवाल भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश महामंत्री भी हैं।  

10- स्वतंत्र देव सिंह (राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार)
यह कॉलेज के समय से ही संघ और छात्र राजनीति से जुडे रहे हैं। एक बार विधान परिषद सदस्य भी रहे हैं। संघ और पीएम मोदी के करीबी नेताओं में शुमार हैं। मूल रूप से मिर्जापुर के रहने वाले सिंह अब उरई में रहते हैं। वह युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वर्तमान में वह भाजपा के प्रदेश महामंत्री भी है।

11- उपेंद्र तिवारी, स्वतंत्र प्रभार
बलिया की फेफना से विधायक से विधायक हैं। इन्होंने इलाहाबाद विवि में छात्र राजनीति से शुरूआत की। विद्यार्थी परिषद के बैनर से उपाध्यक्ष पद का चुनाव लड़े लेकिन हार गये। भाजपा के टिकट पर पहली बार 2002 में फेफना विस सीट से चुनाव लड़े लेकिन हार गये। 2007 में भी लड़े और हारे। 2012 के चुनाव में सपा के दिग्गज नेता अम्बिका चौधरी को हराकर पहली बार विधायक। 2017 के विधान सभा चुनाव में उपेन्द्र ने सपा छोड़कर बसपा से चुनाव मैदान में उतरे अम्बिका चौधरी को 17 हजार 941 मतों से परास्त किया।

12- अनिल राजभर (राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार)
वाराणसी के शिवपुर से विधायक अनिल राजभर छात्र जीवन से ही राजनीति के शुरुआत कर चुके थे। इनके पिता रामजीत राजभर भी विधायक रह चुके हैं।

राजनीतिक कैरियर : 
1995 : सकलडीहा पीजी कॉलेज में छात्रसंघ अध्यक्ष 
1996 : समाजवादी युवजन सभा का जिलाध्यक्ष
2000 : सकलडीहा से जिला पंचायत सदस्य 
2003 : चिरईगांव विधानसभा उपचुनाव में सपा से चुनाव लड़े। बसपा प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह से 3200 वोट से हार गये। 
2004 : प्रदेश महासचिव समाजवादी युवजन सभा 
2005 : प्रदेश अध्यक्ष समाजवादी युवजन सभा 
2006 : सलाहकार राज्य योजना आयोग एवं राज्य मंत्री का दर्जा
2009 : चंदौली लोकसभा से सपा प्रत्याशी के रूप में टिकट नहीं मिलने पर सपा छोड़ दी। 
2012 : भाजपा में शमिल हो कर राजभर व बियार जाति को साथ जोड़कर आरक्षण के मुद्दे पर संघर्ष शुरू

 

13- गुलाबो देवी (राज्य मंत्री)
चंदौसी शहर के मौहल्ला सुभाष रोड पर रहने वाली गुलाब देवी पत्नी रामलाल सिंह पेशे से शिक्षक हैं। गुलाबो देवी ने 1991 में राजनीति में कदम रखते हुए भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चंदौसी सीट से चुनाव लड़ा और विधायक बनीं।  इसके बाद 1993 के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।

1996 में जनता ने उन्हें फिर से अपना विधायक चुना। 1996 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो गुलाब देवी को महिला कल्याण एवं बाल विकास राज्य मंत्री बनाया गया। 2002 के चुनाव में गुलाब देवी ने फिर से जीत हासिल की। इसके बाद 2007 व 2012 के चुनाव में गुलाब देवी भाजपा के ही टिकट पर चंदौसी सीट से चुनाव लड़ी मगर दोनों ही बार हार का सामना करना पड़ा। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर फिर से चुनाव लड़ा तो चंदौसी सुरक्षित सीट से भाजपा की विधायक चुनी गईं।

14- मोहसिन रजा ((राज्य मंत्री)
योगी कैबिनेट में शामिल होने वाले एकमात्र मुस्लिम चेहरा हैं। मोहसिन रजा मूलत: लखनऊ के ही रहने वाले हैं। यह कुछ दिन पहले ही बीजेपी में शामिल हुए थे और उन्हें प्रवक्ता भी बनाया था। रजा रणजी मैच भी खेल चुके हैं। रजा अभी किसी भी सदन के सदस्य नहीं है।

बीजेपी ने भले ही यूपी विधानसभा चुनावों में किसी मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में न उतारा हो लेकिन यूपी के भावी सीएम योगी आदित्यनाथ के कैबिनेट में मुस्लिम चेहरा शामिल किया। पूर्व रणजी खिलाड़ी मोहसिन रजा को योगी टीम में राज्यमंत्री बनाया गया है। मोहसिन अभी किसी भी सदन के सदस्य नहीं है।

15- संदीप सिंह (राज्य मंत्री)
यह भाजपा नेता व वर्तमान में राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह के पौत्र हैं। यह अतरौली से 25 साल की उम्र में विधायक बने हैं। उन्होंने अपने पहले ही मुकाबले में समाजवादी पार्टी के वीरेश यादव को 50 हजार वोटों से हराकर बड़ी जीत दर्ज की।

16- मनोहर लाल पंथ उर्फ मन्नू कोरी (राज्यमंत्री)

बुन्देलखंड से मनोहर लाल पंथ विधायक महरौनी (ललितपुर) विधानसभा वरिष्ठ भाजपा नेता है। वह पहली बार भाजपा की विधायक बने जबकि पिछले विधान सभा चुनाव में वो दूसरे स्थान पर रहे । कोरी समाज से है। बुंदेलखंड में बुनकर और कोरी बिरादरी में सामंजस्य बिठालने के लिए उन्हें राज्यमंत्री बनाया गया।

17- नीलकंठ तिवारी (राज्यमंत्री)
इन्हें श्यामदेव राय चौधरी की जगह बीजेपी ने प्रत्याशी बनाया था। यह वाराणसी से विधायक हैं। पीएम मोदी भी वाराणसी से सांसद भी हैं।

18- जयप्रकाश निषाद, राज्यमंत्री
कैबिनेट मंत्री- देवरिया की रुद्रपुर सीट से कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह को हराकर चर्चा में आए जयप्रकाश निषाद 1991 में पहली बार विधायक बने थे। इसके पहले वह रुद्रपुर ब्लाक के अपने गांव रामलक्ष्मीपुर के प्रधान रहे थे। वह भाजपा में जिलाध्यक्ष और प्रदेश मंत्री जैसे पदों पर भी रहे। 56 साल के जयप्रकाश निषाद को योगी
मंत्रीमंडल में कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिल रहा है।
 

19- गिरीश यादव, राज्यमंत्री
जौनपुर सदर से विधायक गिरीश यादव ने राजनीति की शुरुआत 1995 में भाजपा से की।

संगठन में पद: दो बार जिला मंत्री भाजपा, दो बार जिला महामंत्री, दो बार जिला उपाध्यक्ष भाजपा,  2000 में जिला पंचायत सदस्य, 2012 में भाजपा सदर विधानसभा संयोजक, 2014 लोकसभा चुनाव में सदर विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी।

प्राथमिकताएं : मंत्री बनने के बाद पहली प्राथमिकता के आधार पर क्षेत्र व जिले का विकास तथा कार्यकर्ताओं का सम्मान होगा। जिले में अपराध व गुंडागर्दी समाप्त की जाएगी।

20- रणवेंद्र प्रताप सिंह (राज्य मंत्री)
धुन्नी सिंह के नाम से भी जाने जाते हैं। राजपूत जाति से आते हैं। फतेहपुर जिले की हुसैनगंज सीट से विधायक हैं। 

21- महेंद्र सिंह (राज्य मंत्री, स्वतंत्र प्रभार)
यूपी विधान परिषद के सदस्य हैं। असम में भाजपा प्रभारी। ओडिशा पंचायत चुनावों में भाजपा की जीत में अहम भूमिका निभााई। 

22- जय कुमार सिंह (राज्य मंत्री)
अपना दल कोटे से मंत्री बने। 50 साल के जयकुमार कुर्मी नेता हैं। जहानाबाद विधानसभा सीट से विधायक।

23- अर्चना पांडेय (राज्य मंत्री)
अखिलेश सिंह की पत्नी डिंपल यादव के संसदीय क्षेत्र कन्नौज में छिबरा मऊसीट से विधायक बनी हैं।  अंग्रेजी में एम.ए.। 

24- बलदेव ओलख (राज्य मंत्री)
57 वर्षीय ओलख सिख समुदाय से हैं। रामपुर की बिलासपुर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी को 22359 से वोटों से हराया। 

25- सुरेश पासी (राज्य मंत्री)
अमेठी की जगदीशपुर से विधायक। भाजपा के युवा नेताओं में से एक। क्षेत्र में एक कर्मठ नेता के रूप में पहचान। 

26- अतुल गर्ग (राज्य मंत्री)
गाजियाबाद सीट से पहली बार विधायक चुने गए। पूर्व मेयर दिनेश चंद्र गर्ग के बेटे। वैश्य समुदाय में अच्छा प्रभाव रखते हैं। 

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